क्या आपने आज अख़बार देखा? या मार्किट की बातें सुनीं? एक बड़ा उथल-पुथल चल रहा है। सोना और चाँदी के बाज़ार में ऐसी हलचल है, जो सालों बाद देखने को मिल रही है। मेरा मन कर रहा है, आपको सीधे चेतावनी दूं: यह मौका हाथ से निकल गया, तो सच में पछतावा होगा।
मैं भी आपकी तरह एक आम इंसान हूँ। कल शाम जब मैंने ये आँकड़े देखे, तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गयीं। सोने की कीमत एक झटके में आसमान छू रही थी, तो चाँदी ने भी अपनी चमक दिखानी शुरू कर दी। मेरे मन में एक डर सा घर कर गया… “कहीं मैं पीछे तो नहीं रह गया?”
आप भी शायद यही सोच रहे होंगे। लेकिन डरने की नहीं, समझदारी से कदम उठाने की बारी है।
क्या हो रहा है असल में?
सीधी भाषा में समझें तो, दुनिया भर में कुछ ऐसी परिस्थितियाँ बन रही हैं, जिनकी वजह से लोग सोना और चाँदी को एक ‘सुरक्षित घर’ मानने लगे हैं। जब भी शेयर बाजार या दुनिया में उथल-पुथल होती है, लोग भागकर इन्हीं पुराने, भरोसेमंद चीज़ों की ओर जाते हैं। और अभी तो ये उथल-पुथल चरम पर है!
मेरा एक पुराना दोस्त, जो इस क्षेत्र में है, उसने कल फोन करके बस इतना कहा: “भाई, यह ट्रेन है। या तो अभी सवार हो लो, या फिर प्लेटफॉर्म पर देखते रह जाओगे।” उसकी बात सुनकर मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगा। क्योंकि मुझे अपने पापा की एक बात याद आ गई। उन्होंने कहा था, “बेटा, बुरे वक्त में सोना ही साथ देता है।”
आपको क्यों सोचना चाहिए?
सोचिए, क्या आप अपने पैसे को सिर्फ बैंक में रखकर खुश हैं? क्या महँगाई की मार से आपका पैसा सुरक्षित रह पाएगा? सोना और चाँदी सदियों से हमारी संपत्ति को सहेजते आए हैं। ये न तो कभी खराब होते हैं, न ही इनकी कीमत कभी शून्य होती है। यह आपकी पूँजी का स्ट्रॉंग पिलर है।
पर मैं आपको यह नहीं कह रहा कि सब कुछ बेचकर इसमें लगा दो। नहीं! मेरा कहना है कि थोड़ी सी समझदारी दिखाओ। एक छोटी सी शुरुआत करो। हो सकता है, एक सिक्का ख़रीदो, या थोड़ा सा चाँदी का बिस्कुई। यह आपकी फाइनेंशियल सिक्योरिटी की पहली ईंट होगी।














