pm kishan yojana new rules : किसानों के लिए बड़ा झटका या राहत? नए नियम हुए लागू

By realreport

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pm kishan yojana new rules

अरे यार! आज सुबह से मेरा फोन लगातार बज रहा है। हर तरफ बस एक ही चर्चा – किसानों के लिए नए नियम लागू हो गए हैं। जब मैंने पहली बार यह सुना, तो मन में एक तरह की दहशत सी छा गई। “कहीं यह हमारे किसान भाइयों के लिए कोई मुसीबत तो नहीं लेकर आया?” लेकिन दोस्तों, जब मैंने इन नियमों को गहराई से समझने की कोशिश की, तो पूरी तस्वीर कुछ और ही नजर आई। एक मिली-जुली भावना है – थोड़ी चिंता और थोड़ी उम्मीद

ये नए नियम कोई साधारण बदलाव नहीं हैं। ये कृषि क्षेत्र के कुछ मूलभूत तरीकों को छूते हैं, जैसे खाद-बीज के इस्तेमाल से लेकर फसल बिक्री तक। सरकार का दावा है कि यह किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण को बचाने के लिए है। लेकिन हर नए कदम की तरह, इस पर भी दो राय हैं।

तो क्या हैं ये नए नियम?

इनमें से एक प्रमुख नियम कीटनाशकों और रासायनिक खादों के इस्तेमाल पर कुछ पाबंदियों से जुड़ा है। सरकार का लक्ष्य है जैविक खेती को बढ़ावा देना और मिट्टी की सेहत सुधारना। दूसरी तरफ, फसल बिक्री और मंडी व्यवस्था में भी कुछ बदलाव किए गए हैं, ताकि किसानों को बेहतर दाम और सीधी मार्केट एक्सेस मिल सके।

इन नियमों का असर दो तरह से देखा जा रहा है। एक तरफ, जो किसान परंपरागत तरीके से रासायनिक खेती करते आए हैं, उनके लिए यह एक चुनौती हो सकती है और शुरुआती लागत बढ़ा सकती है। वहीं दूसरी ओर, जो किसान प्रगतिशील सोच रखते हैं और लंबे समय में मिट्टी और पर्यावरण के बारे में सोचते हैं, उनके लिए यह एक सुनहरा मौका हो सकता है।

क्या यह झटका है या राहत?

इस सवाल का जवाब पूरी तरह किसान की सोच और तैयारी पर निर्भर करता है।

  • झटका किसके लिए? उन किसानों के लिए जो तेजी से और भरपूर उत्पादन के लिए रसायनों पर निर्भर हैं। अचानक बदलाव और नई तकनीक सीखने की जरूरत उन्हें मुश्किल में डाल सकती है। साथ ही, शुरुआती समय में उपज में कमी का डर भी है।
  • राहत किसके लिए? उन किसानों के लिए जो पहले से जैविक खेती की ओर झुकाव रखते हैं या छोटे स्तर पर कर रहे हैं। उन्हें सरकारी समर्थन और मार्केट मिलने से बड़ा फायदा हो सकता है। साथ ही, मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता और स्वास्थ्यवर्धक उपज का लाभ तो मिलेगा ही।

मुझे अपने गाँव के दो किसान चाचाओं की बात याद आती है। एक, सुखदेव चाचा, हमेशा नई जैविक तकनीकों के बारे में पढ़ते रहते हैं। वह कहते हैं, “अब तो सरकारी मदद भी मिलेगी।” वहीं दूसरे, रामसिंह चाचा, जो पारंपरिक तरीके से ही खेती करते आए हैं, वह चिंतित दिख रहे हैं। उनका कहना है, “नई चीज सीखने में उम्र कब निकल गई, पता ही नहीं चला।”

तो अब क्या करें किसान भाई?

  1. जानकारी इकट्ठा करें: इन नियमों के बारे में विस्तृत और सही जानकारी कृषि विभाग या विश्वसनीय स्रोतों से ही लें। अफवाहों से दूर रहें।
  2. धीरे-धीरे बदलाव लाएं: अगर आप रासायनिक खेती करते हैं, तो एकदम से नहीं, बल्कि थोड़ी-थोड़ी जमीन पर जैविक तरीके आजमाएं। प्रशिक्षण लें
  3. सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं: जैविक खेती के लिए सब्सिडी, प्रशिक्षण और मार्केटिंग सपोर्ट वाली योजनाओं के बारे में पता करें और उनका लाभ उठाएं।
  4. किसान संगठनों से जुड़ें: दूसरे प्रगतिशील किसानों के साथ मिलकर नई चुनौतियों और समाधानों पर चर्चा करें।

अंत में, मेरा मानना है कि हर बड़ा बदलाव शुरुआत में कठिन लगता है। यह नियम चुनौती और अवसर दोनों हैं। **जो इस बदलाव को समझकर **खुद को ढाल लेंगे, वही आगे बढ़ पाएंगे। हमें हमारे किसानों की लचीलापन और समझदारी पर भरोसा है।

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